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शान्ति पर्व
अध्याय २६५
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भीष्म उवाच
सर्वत्यागे च यतते दृष्ट्वा लोकं क्षय़ात्मकम् |  २०   क
ततो मोक्षाय़ यतते नानुपाय़ादुपाय़तः ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति