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शल्य पर्व
अध्याय ३२
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सञ्जय़ उवाच
स कथं वदसे शत्रुं युध्यस्व गदय़ेति ह |  १३   क
एकं च नो निहत्याजौ भव राजेति भारत ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति