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भीष्म पर्व
अध्याय ९६
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सञ्जय़ उवाच
ततः स राक्षसः क्रुद्धः सम्प्राप्यैवार्जुनिं रणे |  २९   क
नातिदूरे स्थितस्तस्य द्रावय़ामास वै चमूम् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति