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द्रोण पर्व
अध्याय १४२
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सञ्जय़ उवाच
अतितीव्रमभूद्युद्धं नरराक्षसय़ोर्मृधे |  ३८   क
द्रष्टॄणां प्रीतिजननं सर्वेषां भरतर्षभ ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति