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आदि पर्व
अध्याय १४३
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वैशम्पाय़न उवाच
सद्यो हि गर्भं राक्षस्यो लभन्ते प्रसवन्ति च |  ३२   क
कामरूपधराश्चैव भवन्ति वहुरूपिणः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति