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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः स राजा कौरव्यो धृतराष्ट्रो महामनाः |  ६   क
व्राह्मणेभ्यो महार्हेभ्यो ददौ वित्तान्यनेकशः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति