अनुशासन पर्व  अध्याय १४३

भीष्म उवाच

स पौराणीं व्रह्मगुहां प्रविष्टो; महीसत्रं भारताग्रे ददर्श |  १६   क
स चैव गामुद्दधाराग्र्यकर्मा; विक्षोभ्य दैत्यानुरगान्दानवांश्च ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति