अनुशासन पर्व  अध्याय १४३

युधिष्ठिर उवाच

कां वा व्राह्मणपूजाय़ां व्युष्टिं दृष्ट्वा महाव्रत |  २   क
तानर्चसि महावाहो सर्वमेतद्वदस्व मे ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति