अनुशासन पर्व  अध्याय १४३

भीष्म उवाच

स विहाय़ो व्यदधात्पञ्चनाभिः; स निर्ममे गां दिवमन्तरिक्षम् |  २५   क
एवं रम्यानसृजत्पर्वतांश्च; हृषीकेशोऽमितदीप्ताग्नितेजाः ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति