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अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
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भीष्म उवाच
चन्द्रादित्यौ ग्रहनक्षत्रताराः; सर्वाणि दर्शान्यथ पौर्णमास्यः |  ३१   क
नक्षत्रय़ोगा ऋतवश्च पार्थ; विष्वक्सेनात्सर्वमेतत्प्रसूतम् ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति