उद्योग पर्व  अध्याय १४३

कुन्त्यु उवाच

कुण्डली वद्धकवचो देवगर्भः श्रिय़ा वृतः |  ५   क
जातस्त्वमसि दुर्धर्ष मय़ा पुत्र पितुर्गृहे ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति