वन पर्व  अध्याय ७९

जनमेजय़ उवाच

भगवन्काम्यकात्पार्थे गते मे प्रपितामहे |  १   क
पाण्डवाः किमकुर्वन्त तमृते सव्यसाचिनम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति