वन पर्व  अध्याय ६९

वृहदश्व उवाच

ततो नरवरः श्रीमान्नलो राजा विशां पते |  १९   क
सान्त्वय़ामास तानश्वांस्तेजोवलसमन्वितान् ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति