अनुशासन पर्व  अध्याय १४४

वासुदेव उवाच

व्राह्मणो हि महद्भूतमस्मिँल्लोके परत्र च |  १०   क
भस्म कुर्युर्जगदिदं क्रुद्धाः प्रत्यक्षदर्शिनः ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति