अनुशासन पर्व  अध्याय १४४

वासुदेव उवाच

ततो विलोक्य तेजस्वी व्राह्मणो मामुवाच ह |  ३३   क
जितः क्रोधस्त्वय़ा कृष्ण प्रकृत्यैव महाभुज ||  ३३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति