menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १४४
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
यत्ते भिन्नं च दग्धं च यच्च किञ्चिद्विनाशितम् |  ३७   क
सर्वं तथैव द्रष्टासि विशिष्टं वा जनार्दन ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति