शान्ति पर्व  अध्याय ३२२

भीष्म उवाच

पितृशेषेण विप्रांश्च संविभज्याश्रितांश्च सः |  २०   क
शेषान्नभुक्सत्यपरः सर्वभूतेष्वहिंसकः |  २०   ख
सर्वभावेन भक्तः स देवदेवं जनार्दनम् ||  २०   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति