अनुशासन पर्व  अध्याय १४४

वासुदेव उवाच

व्युष्टिं व्राह्मणपूजाय़ां रौक्मिणेय़ निवोध मे |  ६   क
एते हि सोमराजान ईश्वराः सुखदुःखय़ोः ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति