वन पर्व  अध्याय १४४

वैशम्पाय़न उवाच

आलम्वमाना सहितावूरू गजकरोपमौ |  ४   क
पपात सहसा भूमौ वेपन्ती कदली यथा ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति