उद्योग पर्व  अध्याय १४४

कर्ण उवाच

कृतार्थाः सुभृता ये हि कृत्यकाल उपस्थिते |  १६   क
अनवेक्ष्य कृतं पापा विकुर्वन्त्यनवस्थिताः ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति