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विराट पर्व
अध्याय ३८
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वृहन्नडो उवाच
यस्त्वय़ं विमलः खड्गो गव्ये कोशे समर्पितः |  ५८   क
सहदेवस्य विद्ध्येनं सर्वभारसहं दृढम् ||  ५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति