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द्रोण पर्व
अध्याय १४४
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सञ्जय़ उवाच
महद्युद्धं तय़ोरासीद्घोररूपं विशां पते |  १८   क
यथा देवासुरे युद्धे शम्वरामरराजय़ोः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति