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द्रोण पर्व
अध्याय १४४
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सञ्जय़ उवाच
तथा गजान्प्रभिन्नांश्च सुप्रभिन्ना महागजाः |  ३३   क
तस्मिन्नेव पदे यत्ता निगृह्णन्ति स्म भारत ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति