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उद्योग पर्व
अध्याय १४२
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वैशम्पाय़न उवाच
राजा तु धृतराष्ट्रोऽय़ं वय़ोवृद्धो न शाम्यति |  ५   क
मत्तः पुत्रमदेनैव विधर्मे पथि वर्तते ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति