menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
गृहीतं वाजिनं दृष्ट्वा प्रीतात्मा स धनञ्जय़ः |  १८   क
पुत्रं रथस्थं भूमिष्ठः संन्यवारय़दाहवे ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति