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आदि पर्व
अध्याय १४५
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व्राह्मण उवाच
न हि योगं प्रपश्यामि येन मुच्येय़मापदः |  २५   क
पुत्रदारेण वा सार्धं प्राद्रवेय़ामनामय़म् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति