आदि पर्व  अध्याय १४५

व्राह्मण उवाच

इह जाता विवृद्धास्मि पिता चेह ममेति च |  २७   क
उक्तवत्यसि दुर्मेधे याच्यमाना मय़ासकृत् ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति