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आदि पर्व
अध्याय १४५
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वैशम्पाय़न उवाच
चेरुर्भैक्षं तदा ते तु सर्व एव विशां पते |  ४   क
वभूवुर्नागराणां च स्वैर्गुणैः प्रिय़दर्शनाः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति