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अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
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महेश्वर उवाच
सावित्री व्रह्मणः साध्वी कौशिकस्य शची सती |  ३   क
मार्तण्डजस्य धूमोर्णा ऋद्धिर्वैश्रवणस्य च ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति