अनुशासन पर्व  अध्याय १४५

युधिष्ठिर उवाच

दुर्वाससः प्रसादात्ते यत्तदा मधुसूदन |  १   क
अवाप्तमिह विज्ञानं तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति