menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
प्रजापतेश्च दक्षस्य यजतो वितते क्रतौ |  ११   क
विव्याध कुपितो यज्ञं निर्भय़स्तु भवस्तदा |  ११   ख
धनुषा वाणमुत्सृज्य सघोषं विननाद च ||  ११   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति