अनुशासन पर्व  अध्याय १४५

वासुदेव उवाच

पूषाणं चाभिदुद्राव परेण वपुषान्वितः |  १८   क
पुरोडाशं भक्षय़तो दशनान्वै व्यशातय़त् ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति