menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
स चापि व्राह्मणो भूत्वा दुर्वासा नाम वीर्यवान् |  ३५   क
द्वारवत्यां मम गृहे चिरं कालमुपावसत् ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति