अनुशासन पर्व  अध्याय १४५

वासुदेव उवाच

विप्रकारान्प्रय़ुङ्क्ते स्म सुवहून्मम वेश्मनि |  ३६   क
तानुदारतय़ा चाहमक्षमं तस्य दुःसहम् ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति