अनुशासन पर्व  अध्याय १४५

वासुदेव उवाच

स धाता स विधाता च विश्वकर्मा स सर्ववित् |  ३९   क
नक्षत्राणि दिशश्चैव प्रदिशोऽथ ग्रहास्तथा |  ३९   ख
विश्वमूर्तिरमेय़ात्मा भगवानमितद्युतिः ||  ३९   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति