वन पर्व  अध्याय १४५

वैशम्पाय़न उवाच

तमसा रहितं पुण्यमनामृष्टं रवेः करैः |  २४   क
क्षुत्तृट्शीतोष्णदोषैश्च वर्जितं शोकनाशनम् ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति