उद्योग पर्व  अध्याय १४५

वासुदेव उवाच

तस्यां जज्ञे महावाहुः श्रीमान्कुरुकुलोद्वहः |  २०   क
विचित्रवीर्यो धर्मात्मा कनीय़ान्मम पार्थिवः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति