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उद्योग पर्व
अध्याय १४५
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वासुदेव उवाच
यदा त्वराजके राष्ट्रे न ववर्ष सुरेश्वरः |  २४   क
तदाभ्यधावन्मामेव प्रजाः क्षुद्भय़पीडिताः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति