वन पर्व  अध्याय २०५

व्याध उवाच

यत्तदा त्वं द्विजश्रेष्ठ तय़ोक्तो मां प्रति प्रभो |  ५   क
दृष्टमेतत्तय़ा सम्यगेकपत्न्या न संशय़ः ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति