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द्रोण पर्व
अध्याय १०७
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सञ्जय़ उवाच
पुनरेव ततो राजन्महानासीत्सुदारुणः |  ५   क
विमर्दः सूतपुत्रस्य भीमस्य च विशां पते ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति