menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १४५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
छित्त्वा तु समरे वाणं शरैः संनतपर्वभिः |  १५   क
धृष्टद्युम्नं रणे कर्णो विव्याध दशभिः शरैः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति