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वन पर्व
अध्याय ६१
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दमय़न्त्यु उवाच
एवं साशोकवृक्षं तमार्ता त्रिः परिगम्य ह |  १०३   क
जगाम दारुणतरं देशं भैमी वराङ्गना ||  १०३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति