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द्रोण पर्व
अध्याय १४५
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सञ्जय़ उवाच
कर्णस्य मतमाज्ञाय़ पुत्रस्ते प्राह सौवलम् |  ५९   क
यथेन्द्रः समरे राजन्प्राह विष्णुं यशस्विनम् ||  ५९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति