स्त्री पर्व  अध्याय २३

गान्धार्यु उवाच

एष शल्यो हतः शेते साक्षान्नकुलमातुलः |  १   क
धर्मज्ञेन सता तात धर्मराजेन संय़ुगे ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति