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आदि पर्व
अध्याय २१६
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अर्जुन उवाच
सर्वतः परिवार्यैनं दावेन महता प्रभो |  ३०   क
कामं सम्प्रज्वलाद्यैव कल्यौ स्वः साह्यकर्मणि ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति