अनुशासन पर्व  अध्याय १४६

वासुदेव उवाच

द्वे तनू तस्य देवस्य वेदज्ञा व्राह्मणा विदुः |  ३   क
घोरामन्यां शिवामन्यां ते तनू वहुधा पुनः ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति