वन पर्व  अध्याय १४६

वैशम्पाय़न उवाच

यदि तेऽहं प्रिय़ा पार्थ वहूनीमान्युपाहर |  ११   क
तान्यहं नेतुमिच्छामि काम्यकं पुनराश्रमम् ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति