वन पर्व  अध्याय १४६

वैशम्पाय़न उवाच

स यक्षगन्धर्वसुरव्रह्मर्षिगणसेवितम् |  २३   क
विलोडय़ामास तदा पुष्पहेतोररिन्दमः ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति