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शान्ति पर्व
अध्याय ८४
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भीष्म उवाच
राज्यं प्रणिधिमूलं हि मन्त्रसारं प्रचक्षते |  ४८   क
स्वामिनं त्वनुवर्तन्ति वृत्त्यर्थमिह मन्त्रिणः ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति