वन पर्व  अध्याय १४६

वैशम्पाय़न उवाच

अभिरामनदीकुञ्जनिर्झरोदरकन्दरम् |  २६   क
अप्सरोनूपुररवैः प्रनृत्तवहुवर्हिणम् ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति